Guruji satsang

9th march 2016
जय गुरूजी
गुरूजी की नज़र  लगातार हमारी हरकतों पर रहती है ...हम संगत बड़े मंदिर जाते हैं ..या  कहीं  और सत्संग में जाते हैं ...हमारा ध्यान शबद पर नहीं होता ..हमें ये पता है कि लंगर प्रसाद खाने से सारी  तकलीफों से निजात मिलता है ..तो हम वहां लंगर खाने के लिए ही उतावले रहते हैं ..

लंगर को प्रसाद किसने बनाया ..ये सोचने की भी जरूरत नहीं  समझते  ...मंदिर गए हैं .. किसी भी तरह से  हमें  लंगर मिल जाये ..बस हो गया ..vip बन कर पहले लंगर प्रसाद ले लें ..या फिर पक्तियां तोड़कर और संगत से आगे चले जाएँ ..हम ऐसे उटपटांग हरकत करते ही रहते  हैं  ..

हमारे प्रैक्टिकल गुरूजी ने एक बड़ा ही सटीक उदाहरण   देकर हमें  समझाने की कोशिश की है ...कहीं भी मंदिरों में जहाँ प्रसाद बंटता है ..लोग लाइन में खड़े होकर  किसी  भी तरह से ज्यादा से ज्यादा प्रसाद लेने  चाहते हैं  ..गुरूजी कहते हैं ..कि ये जो हम प्रसाद या फूल या जल इकठ्ठा करके घर ले कर जाते हैं..इनसे कुछ भी नहीं संवरने वाला  है ...यदि प्रसाद को फलना है तो लड्डू के  एक  बूंदी भी ग्रहण करने से हमारा कल्याण हो जायेगा ... यदि  ज्यादा प्रसाद खाने से ही कल्याण होता तो मंदिर के बहार बैठे भिखारियों के पास तो  थैले भर भर कर बूंदी के  लड्डू होते  हैं ..पर इनकी दशा तो वही  रहती है  ..कोई बदलाव नहीं  आता ..
ऐसा इस कारण  है कि  हम अपने कर्म कटवाने पर ध्यान नहीं दते ...जिस स्तिथि में रब ने आज भेजा है ..वो तो कर्म का ही फल है ..अब हम अपने भाव सही नहीं करते ..पूजा करते भी हैं ..तो धुप और फूल को ही महत्व दे कर निकल  जाते  हैं ...जब हम ईश्वर से जुड़ेंगे ...जब हम उनसे अपने कर्मों की माफ़ी मांगेंगे ..जब हम अपने अंदर को तैयार करेंगे ये मानने के लिए की जो ईश्वर ने आज दिया है ..वही  हमारे  लिए सबसे सही है ..और उस फेज को हँसते हँसते निकालने की कोशिश  करेंगे  ..तभी तो ईश्वर हमारे कर्म कटवाना शुरू करेंगे .

हम थोडा सा जुड़ जाते हैं ..और फिर कहते हैं ..कि अब आपने हमारा हाथ पकड़ लिया है ..अब आप ही करो जो  करना है ...गुरूजी ही करेंगे ..जो  करना  है .ये तो  सही  है ..पर हमने सेवा सिमरन और सत्संग करते हुए अपने को इस लायक तो रखना है कि  जो गुरूजी हमारे लिए कर रहे हैं ..उसे हम ग्रहण कर सकें ..हम क्या करते हैं .. जुड़े  ..लेकिन अब फिर से अपनी पुरानी जिन्दगी में लौट गए ..वही समय बर्बादी ...वैसी ही मस्ती ..कहीं भी गुरु का नाम नहीं ..ध्यान नही ...  उसी तरह  धनोर्पार्जन के लिए दूसरों का गला  काटना ..कैसे  कर्म कटवाएँगे गुरूजी हमारा ..हम तो रोज़ नए कर्म बना रहे हैं

गुरूजी  हमें हर हाल में पार उतारने की कोशिश कर रहे हैं ...सभी को कोई न कोई  धागा दे रखा है ..जिससे बंधे  हम  समय निकाल पा  रहे हैं  ...समय ही तो सही तरीके से निकालना है ..गुरूजी हमपर तो काम कर ही रहे हैं ...

किसी  को सजने में ख़ुशी मिलती है ..उसे सजने की ब्लेस्सिंग दे दिया .. किसी को शौपिंग में अच्छा लगता है ..उसे वैसे ही ब्लेस कर दिया .. किसी  को माँ  चाहिए , किसी को पति चाहिए ...किसी को बच्चा चाहिए ..गुरूजी को पता है की हम इंसान किसी न  किसी  जुडाव  के कारण  ही इस जीवन से  बंधे  होते हैं ..गुरूजी हमारे ख़ुशी को देखते हुए कहते हैं ..” जाओ वही करो जिसमें ख़ुशी मिलती है ...” पर हमें अपने भाव तो पवित्र रखने हैं ...

हम क्या करते हैं ..साज़ धज गए और लगे तुलना करने की ये तो हमसे कम और ये तो हमारे सामने टिक ही नही सकता ..हम अपनी ब्लेस्सिंग याद नहीं रखते ..की गुरूजी ने हमें ये दिया तो सामने वाले को भी तो कुछ और दिया होगा ..हमें फूल सजाना अच्छा लगत है ..हमें वो सेवा दे देते हैं ..पर हमारे अंदर सिर्फ सजाने वाली भावना ही नहीं रहती ..हममें  दूसरों को नीचा  दिखाने वाली भावना भी साथ साथ चलती है ..अब ऐसे में  गुरूजी हमसे  परेशां ही तो होते हैं ..हमें जो दिया हम उस  ख़ुशी को क्यूँ  नहीं जी लेते हैं ..हम हर वक़्त इस लिए परेशां रहते हैं की दुसरे को क्या मिल गया ..ये नहीं  सोचते की हम गुरूजी से कितने करीब आये ...हम ये देखते हैं कि दूसरों को गुरूजी ने क्या ब्लेस किया ...

कर्म बनाना बहुत आसान है पर उसे कटवाना बहुत ही मुश्किल ..कहते तो सभी हैं ..कि गुरूजी हमारे कर्म कटवा रहे हैं ..पर अपने कर्म काटने के लिए हमारे साइड से हमने क्या प्रयत्न किया है ..ये नही सोचते ..कोई सेवा दी ..कठिन लगा .. किसी  और के जिम्मे लगा दिया ..अब  गुरूजी ने तो हमें देना चाह था ..हमने लिया ही नहीं ..

सेवा  का मतलब ही हम नहीं समझ पा रहे हैं ..घर में यदि कोई बीमार है तो उसकी तीमारदारी से हमारे कर्म कटवाएँगे ..घर में  गृहस्थी  के काम को निपुणता के  साथ  करवाकर हमारे कर्म कटवाएँगे ..नौकरी  छुड़ाकर  घर बैठाकर कर्म कटवाएँगे ...शादी में लेट हो रही है ..तो हमारे कर्म ही तो कटवा रहे हैं ..पर हम बैचैन लोग ..गुरूजी की मेहर को समझना ही नहीं चाहते ..

मेरे साथ जो सबसे अच्छी  बात हुई ..गुरूजी से जुड़ने के बाद वो  ये समझ का दे देना था ..कि यदि हम गुरूजी के पास हैं और फिर भी  हमारे साथ कोई घटना या दुर्घटना हो रही है ..हमारा कोई  नुकसान  या फ़ायदा हो रहा है ..तो यही सबसे  अच्छी बात हो सकती है इस क्षण में ..इसके अलावा कोई विकल्प हो ही  नहीं सकता ..अच्छा या बुरा ..

कारण तब हम गुरुजी को अपने माँ पिता के  रूप  में देखते हैं ..और  ऐसा  माँ पिता जो सबकुछ करने में सक्षम है ..जब एक साधारण माँ पिता अपने बच्चों की ख़ुशी के लिए उस समय जो सबसे उतम  कदम होता है वो उठाता है ..तो हमारे परमपिता  गुरूजी ..जो भी देंगे ..वो हमारे लिए सर्वोतम ही तो होगा
यही भाव ने मुझे गुरूजी के हर लीला को स्वीकार करने योग्य बनाया है ..और गुरूजी जब रहस्य खोलते हैं  अपनी लीला का तो ये समझ भी आ जाता है ..कि कितनी बड़ी ब्लेस्सिंग दी उन्होंने ..इस घटना से

हमारे जीवन में रंग रहे और बिना वैराग्य के भी हम शिव तत्व को पा जायें ..ये दे रहे हैं गुरूजी ...हम संगत को ..पर हम छोटी छोटी बातों में उलझकर   अपनी छोटी छोटी  मांग गुरूजी के सामने रखकर अपनी ही ब्लेस्सिंग गवां रहे हैं ..
हम सांसारिक लोग शादी को अपने जीवन में बहुत महत्व देते हैं ...जिनकी शादियाँ नहीं हुई हैं ..वो गुरूजी से बार बार मांग रहे हैं .. कोई भी पिता जब अपने बच्चे  का रिश्ता करता है तो ये ध्यान रखता है कि उसका भविष्य वहां सुरक्षित रहे ..अब गुरूजी को जो दिख रहा है हमारे भविष्य में उसे देखकर यदि वो अभी शादी ब्लेस नहीं कर रहे हैं ..तो हमें ज़िप लगाकर  धैर्य के  साथ  इंतज़ार करना चाहिए ..

क्या होगा यदि शादी के अगले ही दिन हम वापस अपने मायके आ जाये ..हैं  ऐसे संगत  जिनके  साथ  ऐसा हुआ है ..कोई दो माह तो कोई साल भर  बाद  भी अपना गृहस्थ जीवन शुरू नहीं  कर पाया ..कुछ लोग ऐसे भी हैं ..जहाँ पति पत्नी दोनों में  प्यार  है पर वो एक दुसरे से अलग रह रहे हैं ...कैसे ब्लेस करें गुरूजी यदि शादी के बाद  काल  मृत्यु का योग दिख रहा है ..

ऐसा नहीं  है की हम  संगत ये समझते नहीं हैं ..हम सब कुछ जान रहे हैं ..सुन रहे हैं ...पढ़ रहे हैं ..पर हम जो मानते हैं वो  अलग ही है ...हमारी सोच है कि गुरूजी  तो सबकुछ करने में समर्थ हैं ..तो वो पहले हमारे जो बुरे योग हैं उसको खत्म कर दें और अभी का  अभी हमें ब्लेस कर दें ..

ऐसा नहीं  हो सकता है ..हम सभी प्रकृति के नियम से बंधे हैं ..गुरूजी भी हमारे कर्मों को तभी स्वाहा  करते हैं जब हम उसे ख़त्म करने के लिए उपाय करा रहे हैं ...जैसे सदियों से  महा मृत्युंजय मंत्र का जाप  मृत्यु  से लड़ने में सहायक होता  रहा ..उसी तरह गुरूजी ने ये साधारण सा मंत्र दिया हमें ..

किसी अनुष्ठान की जरूरत नही बताया ..हम बस मन में जपें ...मन से जपें..सत्संग में शुद्ध भाव से बैठे ताकि हमारा बुरा वक़्त  कटता जाए ..वो अपने मौजूदगी में हमारे कर्म कटवाते हैं ..लंगर जल प्रसाद सत्संग इत्यादि के द्वारा हमें वहां तक पहुँचाना चाह रहे हैं ..जहाँ जाकर वो कहें ..हाँ अब ठीक है जाओ तुम्हारी ख़ुशी तुम्हे ब्लेस किया ..

हम अपने को वहां तक पहुंचाने दें तब तो वो  शुभ अवसर आएगा ..हम रास्ते में ही घबरा  जाते  हैं ..किसी और का हाथ पकड़कर ऊपर आना चाहते हैं ..ऐसा नहीं हो सकता .. अपनी यात्रा खुद ही काटनी होगी ..

कोई रास्ता  दिखा सकता है .पर अपना समय तो हमें ही positive करना होगा ..गुरूजी तो हैं ही सबके साथ ...चलने के लिए तैयार ..
जय गुरूजी

Goodness brings goodness

*बहुत सुंदर कथा ..*

*एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी..।*

*वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी, जिसे कोई भी ले सकता था..।*

*एक कुबड़ा व्यक्ति रोज़ उस रोटी को ले जाता और बजाय धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा..।"*

*दिन गुजरते गए और ये सिलसिला चलता रहा..*

*वो कुबड़ा रोज रोटी लेके जाता रहा और इन्ही शब्दों को बड़बड़ाता - "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.।"*

*वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन खुद से कहने लगी की-"कितना अजीब व्यक्ति है,एक शब्द धन्यवाद का तो देता नहीं है, और न जाने क्या-क्या बड़बड़ाता रहता है, मतलब क्या है इसका.।"*

*एक दिन क्रोधित होकर उसने एक निर्णय लिया और बोली-"मैं इस कुबड़े से निजात पाकर रहूंगी।"*

*और उसने क्या किया कि उसने उस रोटी में ज़हर मिला दिया जो वो रोज़ उसके लिए बनाती थी, और जैसे ही उसने रोटी को को खिड़की पर रखने कि कोशिश की, कि अचानक उसके हाथ कांपने लगे और रुक गये और वह बोली- "हे भगवन, मैं ये क्या करने जा रही थी.?" और उसने तुरंत उस रोटी को चूल्हे कि आँच में जला दिया..। एक ताज़ा रोटी बनायीं और खिड़की के सहारे रख दी..।*

*हर रोज़ कि तरह वह कुबड़ा आया और रोटी ले के: "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा" बड़बड़ाता हुआ चला गया..।*

*इस बात से बिलकुल बेख़बर कि उस महिला के दिमाग में क्या चल रहा है..।*

*हर रोज़ जब वह महिला खिड़की पर रोटी रखती थी तो वह भगवान से अपने पुत्र कि सलामती और अच्छी सेहत और घर वापसी के लिए प्रार्थना करती थी, जो कि अपने सुन्दर भविष्य के निर्माण के लिए कहीं बाहर गया हुआ था..। महीनों से उसकी कोई ख़बर नहीं थी..।*

*ठीक उसी शाम को उसके दरवाज़े पर एक दस्तक होती है.. वह दरवाजा खोलती है और भोंचक्की रह जाती है.. अपने बेटे को अपने सामने खड़ा देखती है..।*

*वह पतला और दुबला हो गया था.. उसके कपडे फटे हुए थे और वह भूखा भी था, भूख से वह कमज़ोर हो गया था..।*

*जैसे ही उसने अपनी माँ को देखा, उसने कहा- "माँ, यह एक चमत्कार है कि मैं यहाँ हूँ.. आज जब मैं घर से एक मील दूर था, मैं इतना भूखा था कि मैं गिर गया.. मैं मर गया होता..।*

*लेकिन तभी एक कुबड़ा वहां से गुज़र रहा था.. उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया.. भूख के मरे मेरे प्राण निकल रहे थे.. मैंने उससे खाने को कुछ माँगा.. उसने नि:संकोच अपनी रोटी मुझे यह कह कर दे दी कि- "मैं हर रोज़ यही खाता हूँ, लेकिन आज मुझसे ज़्यादा जरुरत इसकी तुम्हें है.. सो ये लो और अपनी भूख को तृप्त करो.।"*

*जैसे ही माँ ने उसकी बात सुनी, माँ का चेहरा पीला पड़ गया और अपने आप को सँभालने के लिए उसने दरवाज़े का सहारा लीया..।*

*उसके मस्तिष्क में वह बात घुमने लगी कि कैसे उसने सुबह रोटी में जहर मिलाया था, अगर उसने वह रोटी आग में जला के नष्ट नहीं की होती तो उसका बेटा उस रोटी को खा लेता और अंजाम होता उसकी मौत..?*

*और इसके बाद उसे उन शब्दों का मतलब बिलकुल स्पष्ट हो चूका था-*
*जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा,और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा।।*

              *" निष्कर्ष "*
           ==========
*हमेशा अच्छा करो और अच्छा करने से अपने आप को कभी मत रोको, फिर चाहे उसके लिए उस समय आपकी सराहना या प्रशंसा हो या ना हो..।*
            ========

अगर आपको ये कहानी पसंद आई हो तो इसे दूसरों के साथ ज़रूर शेयर करें..

मैं आपसे दावे के साथ कह सकता हूँ कि ये बहुत से लोगों के जीवन को छुएगी व बदलेगी.
🙏🏻🙏🏻

Satsang of guruji

SATSANG SHARED BY SANGAT AUNTY JI
----------------------------------------------

Om Namah ShivayaI
I deal with depression
and my medications were not responding. One day a sangat called me up informing that Guruji wanted me to do Shiv Puran Path. Being a keen follower of lord Shiva, I couldn't say no and accepted it happily.
It has been a miracle that since I started doing the path, within a few days of doing the path, my breakdowns and cryouts due to depression resolved and I recovered from lack of energy.
However I am still on my medication but the powers of the universe channelized their energies to miraculously heal me.
I personally have a very strong bond and connection with Lord Shiva and I feel how he has been taking care of me throughout.
Now that my Shiv Puran Seva has come to an end, guru ji has sent message to recite and meditate mahamrityunjay mantra, which too I believe with be beneficial in coping up with depression.🙏🙏🙏🙏

Om Namah Shivaya 🙏🙏🙏

Story of Saint

ऋषिकेश में गंगा जी के किनारे एक संत रहा करते।।
वह जन्मांध थे

और उनका नित्य का एक नियम था कि वह शाम के समय ऊपर गगन चुंबी पहाड़ों में भृमण करने के लिये निकल जाते और हरी नाम का संकीर्तन करते जाते।।

एक दिन उनके एक शिष्य ने उनसे पूछा

बाबा आप हर रोज इतने ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर भृमण हेतु जाते हैं

वहां बहुत गहरी गहरी खाइयां भी हैं
और आपको आंखों से दिखलाई नहीं देता।।

क्या आपको डर नहीं लगता ?

अगर कभी पांव लड़खड़ा गये तो ?

बाबा ने कुछ नहीं कहा और शाम के समय शिष्य को साथ ले चले।।

पहाड़ों के मध्य थे तो बाबा ने शिष्य से कहा

जैसे ही कोई गहरी खाई आये तो बताना।।

दोनों चलते रहे
और जैसे ही गहरी खाई आयी
शिष्य ने बताया कि बाबा गहरी खाई आ चुकी है।।

बाबा ने कहा
मुझे इसमें धक्का दे दे।।

अब तो शिष्य इतना सुनते ही सकपका गया।।
उसने कहा
बाबा मैं आपको धक्का कैसे दे सकता हूँ।।
मैं ऐसा हरगिज नहीं कर सकता।।
आप तो मेरे गुरुदेव हैं
मैं तो किसी अपने शत्रु को भी इस खाई में नहीं धकेल सकता।।
बाबा ने फिर कहा
मैं कहता हूं कि मुझे इस खाई में धक्का दे दो।।
यह मेरी आज्ञा है
और मेरी आज्ञा की अवहेलना करोगे तो नर्क गामी होगे।।
शिष्य ने कहा
बाबा मैं नर्क भोग लूंगा मगर आपको हरगिज इस खाई में नहीं धकेल सकता।।
तब बाबा ने शिष्य से कहा
रे नादान बालक

जब तुझ जैसा एक साधारण प्राणी मुझे खाई में नहीं धकेल सकता तो बता

मेरा मालिक भला कैसे मुझे खाई में गिरने देगा।।
उसे तो सिर्फ गिरे हुओं को उबारना आता है
गिरे हुओं को उठाना आता है
वह कभी भी किसी को गिरने नहीं देता।।
वह पल पल हमारे साथ है
बस हमें विश्वास रखना होगा उस पर।

Mother a tireless person

👌🏾बर्तनों की आवाज़ देर रात तक आ रही थी...
रसोई का नल चल रहा है
माँ रसोई में है....

तीनों बहुऐं अपने-अपने कमरे में सोने जा चुकी....
माँ रसोई में है...

माँ का काम बकाया रह गया था
पर काम तो सबका था
पर माँ तो अब भी सबका काम अपना ही मानती है....

दूध गर्म करके
ठण्ड़ा करके
जावण देना है...
ताकि सुबह बेटों को ताजा दही मिल सके...

सिंक में रखे बर्तन माँ को कचोटते हैं
चाहे तारीख बदल जाये, सिंक साफ होना चाहिये....

बर्तनों की आवाज़ से
बहू-बेटों की नींद खराब हो रही है
बड़ी बहू ने बड़े बेटे से कहा
"तुम्हारी माँ को नींद नहीं आती क्या? ना खुद सोती है और ना ही हमें सोने देती है"

मंझली ने मंझले बेटे से कहा " अब देखना सुबह चार बजे फिर खटर-पटर चालू हो जायेगी, तुम्हारी माँ को चैन नहीं है क्या?"

छोटी ने छोटे बेटे से कहा " प्लीज़ जाकर ये ढ़ोंग बन्द करवाओ कि रात को सिंक खाली रहना चाहिये"

माँ अब तक बर्तन माँज चुकी थी ।
झुकी कमर
कठोर हथेलियां
लटकी सी त्वचा
जोड़ों में तकलीफ
आँख में पका मोतियाबिन्द
माथे पर टपकता पसीना
पैरों में उम्र की लड़खडाहट
मगर....
दूध का गर्म पतीला
वो आज भी अपने पल्लू  से उठा लेती है
और...
उसकी अंगुलियां जलती नहीं है, क्यों कि
वो माँ है ।

दूध ठण्ड़ा हो चुका...
जावण भी लग चुका...
घड़ी की सुईयां थक गई...
मगर...
माँ ने फ्रिज में से भिण्ड़ी निकाल ली
और...
काटने लगी
उसको नींद नहीं आती है, क्यों कि
वो माँ है ।

कभी-कभी सोचता हूं कि माँ जैसे विषय पर लिखना, बोलना, बनाना, बताना, जताना क़ानूनन  बन्द होना चाहिये....
क्यों कि यह विषय निर्विवाद है
क्यों कि यह रिश्ता स्वयं कसौटी है ।

रात के बारह बजे सुबह की भिण्ड़ी कट गई...
अचानक याद आया कि गोली तो ली ही नहीं...
बिस्तर पर तकिये के नीचे रखी थैली निकाली..
मूनलाईट की रोशनी में
गोली के रंग के हिसाब से मुंह में रखी और
गटक कर पानी पी लिया...

बगल में एक नींद ले चुके बाबूजी ने कहा " आ गई"
"हाँ, आज तो कोई काम ही नहीं था"
माँ ने जवाब दिया ।

और...
लेट गई, कल की चिन्ता में
पता नहीं नींद आती होगी या नहीं पर सुबह वो थकान रहित होती हैं, क्यों कि
वो माँ है ।

सुबह का अलार्म बाद में बजता है
माँ की नींद पहले खुलती है
याद नहीं कि कभी भरी सर्दियों में भी
माँ गर्म पानी से नहायी हो
उन्हे सर्दी नहीं लगती, क्यों कि
वो माँ है ।

अखबार पढ़ती नहीं, मगर उठा कर लाती है
चाय पीती नहीं, मगर बना कर लाती है
जल्दी खाना खाती नहीं, मगर बना देती है....
क्यों कि वो माँ है ।

माँ पर बात जीवनभर खत्म ना होगी..
शेष अगली बार...

और हाँ,
अगर पढ़ते पढ़ते आँखों में आँसु आ जाये तो कृपया खुलकर रोइये 

और आंसू पोछ कर एक बार अपनी माँ को जादू की झप्पी जरूर दीजिये,

क्योंकि वो किसी और की नही आपकी ही माँ है‼✔

Glorious story of Sikhism

क्या आप जानते हैं विश्व की सबसे मंहंगी ज़मीन सरहिंद, जिला फतेहगढ़ साहब (पंजाब) में है, जो मात्र 4 स्क्वेयर मीटर है।
यहां पर श्री गुरु गोविंद सिंह जी क दोे छोटे साहिबजादों का अंतिम संस्कार किया गया था।
सेठ दीवान टोडर मल ने यह ज़मीन 78000 सोने की मोहरें (सिक्के) दे कर मुस्लिम बादशाह से खरीदी थी। सोने की कीमत के मुताबिक इस 4 स्कवेयर मीटर जमीन की कीमत 2500000000 (दो अरब पचास करोड़)बनती है।
दुनिया की सबसे मंहंगी जगह खरीदने का रिकॉर्ड सिख धर्म के इतिहास में दर्ज करवाया गया है। आजतक दुनिया के इतिहास में इतनी मंहंगी जगह कहीं नही खरीदी गयी।
और दुनिया के इतिहास में ऐसा युद्ध ना कभी किसी ने पढ़ा होगा ना ही सोचा होगा, जिसमे 10 लाख की फ़ौज का सामना महज 42 लोगों के साथ हुआ था और जीत किसकी होती है?
उन 42 सूरमो की !
यह युद्ध *'चमकौर युद्ध' (Battle of Chamkaur) के नाम से भी जाना जाता है जो कि मुग़ल योद्धा वज़ीर खान की अगवाई में 10 लाख की फ़ौज का सामना सिर्फ 42 सिखों से, 6 दिसम्बर 1704 को हुआ जो कि गुरु गोबिंद सिंह जी की आज्ञा से तैयार हुए थे !

नतीजा यह निकलता है की उन 42 शूरवीरों की जीत होती है और हिंदुस्तान में मुग़ल हुकूमत की नींव, जो बाबर ने रखी थी, उसे जड़ से उखाड़ दिया गया।

औरंगज़ेब ने भी उस वक़्त गुरु गोविंद सिंह जी का लोहा माना और घुटने टेक दिए और ऐसे मुग़ल साम्राज्य का अंत हुआ।

औरंगजेब की तरफ से एक प्रश्न किया गया गुरु गोविंद सिंह जी से, कि यह कैसी फ़ौज तैयार की आपने जिसने 10 लाख की फ़ौज को उखाड़ फेंका?
गुरु गोविंद सिंह जी ने जवाब दिया,

"चिड़ियों से मैं बाज  लडाऊ,
गीदड़ों को मैं शेर बनाऊं
सवा लाख से एक लडाऊं,
तभी गोविंद सिंह नाम कहाउँ !!"

गुरु गोविंद सिंह जी ने जो कहा वो किया और जिन्हें आज हर कोई शीश झुकता है। यह है हमारे भारत की अनमोल विरासत जिसे कभी पढ़ाया ही नहीं जाता!

चमकौर साहिब की जमीन, आगे चलकर, एक समृद्ध सिख ने खरीदी। उस को इसके इतिहास का कुछ पता नहीं था। जब पता चला कि यहाँ गुरु गोविंद सिंह जी के दो बेटे शहीद हुए थे, तो उन्होंने यह ज़मीन गुरु महाराज जी के बेटों की यादगार ( गुरुद्वारा साहिब) के लिए देने का मन बनाया।

जब अरदास करने के समय उस सिख से पूछा गया कि अरदास में उनके लिए गुरु साहिब से क्या विनती करनी है तो उस सिख ने कहा के गुरु जी से विनती करनी है कि मेरे घर कोई औलाद ना हो ताकि मेरे वंश में कोई भी यह कहने वाला ना हो कि यह ज़मीन मेरे बाप दादा ने दी है। वाहेगुरु
और यही अरदास हुई और बिलकुल ऐसा ही हुआ कि उन सिख के घर कोई औलाद नहीं हुई।

Help from god

एक कहानी जो दिल को छू गयी,

एक बार जरूर पढे.......
वह शख्स गाड़ी से उतरा.. और बड़ी तेज़ी से एयरपोर्ट मे घुसा , जहाज़ उड़ने के लिए तैयार था , उसे किसी कांफ्रेंस मे पहुंचना था जो खास उसी के लिए आयोजित की जा रही थी.....
वह अपनी सीट पर बैठा और जहाज़ उड़ गया...अभी कुछ दूर ही जहाज़ उड़ा था कि....कैप्टन ने ऐलान किया , तूफानी बारिश और बिजली की वजह से जहाज़ का रेडियो सिस्टम ठीक से काम नही कर रहा....इसलिए हम क़रीबी एयरपोर्ट पर उतरने के लिए मजबूर हैं.।
जहाज़ उतरा वह बाहर निकल कर कैप्टन से शिकायत करने लगा कि.....उसका एक-एक मिनट क़ीमती है और होने वाली कांफ्रेस मे उसका पहुचना बहुत ज़रूरी है....पास खड़े दूसरे मुसाफिर ने उसे पहचान लिया....और बोला डॉक्टर पटनायक आप जहां पहुंचना चाहते हैं.....टैक्सी द्वारा यहां से केवल तीन घंटे मे पहुंच सकते हैं.....उसने शुक्रिया अदा किया और टैक्सी लेकर निकल पड़ा...

लेकिन ये क्या आंधी , तूफान , बिजली , बारिश ने गाड़ी का चलना मुश्किल कर दिया , फिर भी ड्राइवर चलता रहा...
अचानक ड्राइवर को एह़सास हुआ कि वह रास्ता भटक चुका है...
ना उम्मीदी के उतार चढ़ाव के बीच उसे एक छोटा सा घर दिखा....इस तूफान मे वही ग़नीमत समझ कर गाड़ी से नीचे उतरा और दरवाज़ा खटखटाया....
आवाज़ आई....जो कोई भी है अंदर आ जाए..दरवाज़ा खुला है...

अंदर एक बुढ़िया आसन बिछाए भगवद् गीता पढ़ रही थी...उसने कहा ! मांजी अगर इजाज़त हो तो आपका फोन इस्तेमाल कर लूं...

बुढ़िया मुस्कुराई और बोली.....बेटा कौन सा फोन ?? यहां ना बिजली है ना फोन..
लेकिन तुम बैठो..सामने जल है , पी लो....थकान दूर हो जायेगी..और खाने के लिए भी कुछ ना कुछ फल मिल जायेगा.....खा लो ! ताकि आगे सफर के लिए कुछ शक्ति आ जाये...

डाक्टर ने शुक्रिया अदा किया और जल पीने लगा....बुढ़िया अपने पाठ मे खोई थी कि उसकेे पास उसकी नज़र पड़ी....एक बच्चा कंबल मे लपेटा पड़ा था जिसे बुढ़िया थोड़ी थोड़ी देर मे हिला देती थी...
बुढ़िया फारिग़ हुई तो उसने कहा....मांजी ! आपके स्वभाव और एह़सान ने मुझ पर जादू कर दिया है....आप मेरे लिए भी दुआ
कर दीजिए....यह मौसम साफ हो जाये मुझे उम्मीद है आपकी दुआऐं ज़रूर क़बूल होती होंगी...

बुढ़िया बोली....नही बेटा ऐसी कोई बात नही...तुम मेरे अतिथी हो और अतिथी की सेवा ईश्वर का आदेश है....मैने तुम्हारे लिए भी दुआ की है.... परमात्मा का शुक्र है....उसने मेरी हर दुआ सुनी है..
बस एक दुआ और मै उससे माँग रही हूँ शायद जब वह चाहेगा उसे भी क़बूल कर लेगा...

कौन सी दुआ..?? डाक्टर बोला...

बुढ़िया बोली...ये जो 2 साल का बच्चा तुम्हारे सामने अधमरा
पड़ा है , मेरा पोता है , ना इसकी मां ज़िंदा है ना ही बाप , इस बुढ़ापे मे इसकी ज़िम्मेदारी मुझ पर है , डाक्टर कहते हैं...इसे कोई खतरनाक रोग है जिसका वो इलाज नही कर सकते , कहते हैं एक ही नामवर डाक्टर है , क्या नाम बताया था उसका !
हां "डॉ पटनायक " ....वह इसका ऑप्रेशन कर सकता है , लेकिन मैं बुढ़िया कहां उस डॉ तक पहुंच सकती हूं ? लेकर जाऊं भी तो पता नही वह देखने पर राज़ी भी हो या नही ? बस अब बंसीवाले से ये ही माँग रही थी कि वह मेरी मुश्किल आसान कर दे..!!

डाक्टर की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह रहा है....वह भर्राई हुई आवाज़ मे बोला !
माई...आपकी दुआ ने हवाई जहाज़ को नीचे उतार लिया , आसमान पर बिजलियां कौदवां दीं , मुझे रस्ता भुलवा दिया , ताकि मैं यहां तक खींचा चला आऊं ,हे भगवान! मुझे यकीन ही नही हो रहा....कि भगवान एक दुआ क़बूल करके अपने भक्तौं के लिए इस तरह भी मदद कर सकता है.....!!!!

दोस्तों वह सर्वशक्तीमान है....परमात्मा के बंदो उससे लौ लगाकर तो देखो...जहां जाकर इंसान बेबस हो जाता है , वहा ं से उसकी परमकृपा शुरू होती है...।यह आप सबसे अधिक लोगो को भेजे ताकि मुझ जैसे लाखो लोगो की आँखे खुले।