Story of Saint

ऋषिकेश में गंगा जी के किनारे एक संत रहा करते।।
वह जन्मांध थे

और उनका नित्य का एक नियम था कि वह शाम के समय ऊपर गगन चुंबी पहाड़ों में भृमण करने के लिये निकल जाते और हरी नाम का संकीर्तन करते जाते।।

एक दिन उनके एक शिष्य ने उनसे पूछा

बाबा आप हर रोज इतने ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर भृमण हेतु जाते हैं

वहां बहुत गहरी गहरी खाइयां भी हैं
और आपको आंखों से दिखलाई नहीं देता।।

क्या आपको डर नहीं लगता ?

अगर कभी पांव लड़खड़ा गये तो ?

बाबा ने कुछ नहीं कहा और शाम के समय शिष्य को साथ ले चले।।

पहाड़ों के मध्य थे तो बाबा ने शिष्य से कहा

जैसे ही कोई गहरी खाई आये तो बताना।।

दोनों चलते रहे
और जैसे ही गहरी खाई आयी
शिष्य ने बताया कि बाबा गहरी खाई आ चुकी है।।

बाबा ने कहा
मुझे इसमें धक्का दे दे।।

अब तो शिष्य इतना सुनते ही सकपका गया।।
उसने कहा
बाबा मैं आपको धक्का कैसे दे सकता हूँ।।
मैं ऐसा हरगिज नहीं कर सकता।।
आप तो मेरे गुरुदेव हैं
मैं तो किसी अपने शत्रु को भी इस खाई में नहीं धकेल सकता।।
बाबा ने फिर कहा
मैं कहता हूं कि मुझे इस खाई में धक्का दे दो।।
यह मेरी आज्ञा है
और मेरी आज्ञा की अवहेलना करोगे तो नर्क गामी होगे।।
शिष्य ने कहा
बाबा मैं नर्क भोग लूंगा मगर आपको हरगिज इस खाई में नहीं धकेल सकता।।
तब बाबा ने शिष्य से कहा
रे नादान बालक

जब तुझ जैसा एक साधारण प्राणी मुझे खाई में नहीं धकेल सकता तो बता

मेरा मालिक भला कैसे मुझे खाई में गिरने देगा।।
उसे तो सिर्फ गिरे हुओं को उबारना आता है
गिरे हुओं को उठाना आता है
वह कभी भी किसी को गिरने नहीं देता।।
वह पल पल हमारे साथ है
बस हमें विश्वास रखना होगा उस पर।

Mother a tireless person

👌🏾बर्तनों की आवाज़ देर रात तक आ रही थी...
रसोई का नल चल रहा है
माँ रसोई में है....

तीनों बहुऐं अपने-अपने कमरे में सोने जा चुकी....
माँ रसोई में है...

माँ का काम बकाया रह गया था
पर काम तो सबका था
पर माँ तो अब भी सबका काम अपना ही मानती है....

दूध गर्म करके
ठण्ड़ा करके
जावण देना है...
ताकि सुबह बेटों को ताजा दही मिल सके...

सिंक में रखे बर्तन माँ को कचोटते हैं
चाहे तारीख बदल जाये, सिंक साफ होना चाहिये....

बर्तनों की आवाज़ से
बहू-बेटों की नींद खराब हो रही है
बड़ी बहू ने बड़े बेटे से कहा
"तुम्हारी माँ को नींद नहीं आती क्या? ना खुद सोती है और ना ही हमें सोने देती है"

मंझली ने मंझले बेटे से कहा " अब देखना सुबह चार बजे फिर खटर-पटर चालू हो जायेगी, तुम्हारी माँ को चैन नहीं है क्या?"

छोटी ने छोटे बेटे से कहा " प्लीज़ जाकर ये ढ़ोंग बन्द करवाओ कि रात को सिंक खाली रहना चाहिये"

माँ अब तक बर्तन माँज चुकी थी ।
झुकी कमर
कठोर हथेलियां
लटकी सी त्वचा
जोड़ों में तकलीफ
आँख में पका मोतियाबिन्द
माथे पर टपकता पसीना
पैरों में उम्र की लड़खडाहट
मगर....
दूध का गर्म पतीला
वो आज भी अपने पल्लू  से उठा लेती है
और...
उसकी अंगुलियां जलती नहीं है, क्यों कि
वो माँ है ।

दूध ठण्ड़ा हो चुका...
जावण भी लग चुका...
घड़ी की सुईयां थक गई...
मगर...
माँ ने फ्रिज में से भिण्ड़ी निकाल ली
और...
काटने लगी
उसको नींद नहीं आती है, क्यों कि
वो माँ है ।

कभी-कभी सोचता हूं कि माँ जैसे विषय पर लिखना, बोलना, बनाना, बताना, जताना क़ानूनन  बन्द होना चाहिये....
क्यों कि यह विषय निर्विवाद है
क्यों कि यह रिश्ता स्वयं कसौटी है ।

रात के बारह बजे सुबह की भिण्ड़ी कट गई...
अचानक याद आया कि गोली तो ली ही नहीं...
बिस्तर पर तकिये के नीचे रखी थैली निकाली..
मूनलाईट की रोशनी में
गोली के रंग के हिसाब से मुंह में रखी और
गटक कर पानी पी लिया...

बगल में एक नींद ले चुके बाबूजी ने कहा " आ गई"
"हाँ, आज तो कोई काम ही नहीं था"
माँ ने जवाब दिया ।

और...
लेट गई, कल की चिन्ता में
पता नहीं नींद आती होगी या नहीं पर सुबह वो थकान रहित होती हैं, क्यों कि
वो माँ है ।

सुबह का अलार्म बाद में बजता है
माँ की नींद पहले खुलती है
याद नहीं कि कभी भरी सर्दियों में भी
माँ गर्म पानी से नहायी हो
उन्हे सर्दी नहीं लगती, क्यों कि
वो माँ है ।

अखबार पढ़ती नहीं, मगर उठा कर लाती है
चाय पीती नहीं, मगर बना कर लाती है
जल्दी खाना खाती नहीं, मगर बना देती है....
क्यों कि वो माँ है ।

माँ पर बात जीवनभर खत्म ना होगी..
शेष अगली बार...

और हाँ,
अगर पढ़ते पढ़ते आँखों में आँसु आ जाये तो कृपया खुलकर रोइये 

और आंसू पोछ कर एक बार अपनी माँ को जादू की झप्पी जरूर दीजिये,

क्योंकि वो किसी और की नही आपकी ही माँ है‼✔

Glorious story of Sikhism

क्या आप जानते हैं विश्व की सबसे मंहंगी ज़मीन सरहिंद, जिला फतेहगढ़ साहब (पंजाब) में है, जो मात्र 4 स्क्वेयर मीटर है।
यहां पर श्री गुरु गोविंद सिंह जी क दोे छोटे साहिबजादों का अंतिम संस्कार किया गया था।
सेठ दीवान टोडर मल ने यह ज़मीन 78000 सोने की मोहरें (सिक्के) दे कर मुस्लिम बादशाह से खरीदी थी। सोने की कीमत के मुताबिक इस 4 स्कवेयर मीटर जमीन की कीमत 2500000000 (दो अरब पचास करोड़)बनती है।
दुनिया की सबसे मंहंगी जगह खरीदने का रिकॉर्ड सिख धर्म के इतिहास में दर्ज करवाया गया है। आजतक दुनिया के इतिहास में इतनी मंहंगी जगह कहीं नही खरीदी गयी।
और दुनिया के इतिहास में ऐसा युद्ध ना कभी किसी ने पढ़ा होगा ना ही सोचा होगा, जिसमे 10 लाख की फ़ौज का सामना महज 42 लोगों के साथ हुआ था और जीत किसकी होती है?
उन 42 सूरमो की !
यह युद्ध *'चमकौर युद्ध' (Battle of Chamkaur) के नाम से भी जाना जाता है जो कि मुग़ल योद्धा वज़ीर खान की अगवाई में 10 लाख की फ़ौज का सामना सिर्फ 42 सिखों से, 6 दिसम्बर 1704 को हुआ जो कि गुरु गोबिंद सिंह जी की आज्ञा से तैयार हुए थे !

नतीजा यह निकलता है की उन 42 शूरवीरों की जीत होती है और हिंदुस्तान में मुग़ल हुकूमत की नींव, जो बाबर ने रखी थी, उसे जड़ से उखाड़ दिया गया।

औरंगज़ेब ने भी उस वक़्त गुरु गोविंद सिंह जी का लोहा माना और घुटने टेक दिए और ऐसे मुग़ल साम्राज्य का अंत हुआ।

औरंगजेब की तरफ से एक प्रश्न किया गया गुरु गोविंद सिंह जी से, कि यह कैसी फ़ौज तैयार की आपने जिसने 10 लाख की फ़ौज को उखाड़ फेंका?
गुरु गोविंद सिंह जी ने जवाब दिया,

"चिड़ियों से मैं बाज  लडाऊ,
गीदड़ों को मैं शेर बनाऊं
सवा लाख से एक लडाऊं,
तभी गोविंद सिंह नाम कहाउँ !!"

गुरु गोविंद सिंह जी ने जो कहा वो किया और जिन्हें आज हर कोई शीश झुकता है। यह है हमारे भारत की अनमोल विरासत जिसे कभी पढ़ाया ही नहीं जाता!

चमकौर साहिब की जमीन, आगे चलकर, एक समृद्ध सिख ने खरीदी। उस को इसके इतिहास का कुछ पता नहीं था। जब पता चला कि यहाँ गुरु गोविंद सिंह जी के दो बेटे शहीद हुए थे, तो उन्होंने यह ज़मीन गुरु महाराज जी के बेटों की यादगार ( गुरुद्वारा साहिब) के लिए देने का मन बनाया।

जब अरदास करने के समय उस सिख से पूछा गया कि अरदास में उनके लिए गुरु साहिब से क्या विनती करनी है तो उस सिख ने कहा के गुरु जी से विनती करनी है कि मेरे घर कोई औलाद ना हो ताकि मेरे वंश में कोई भी यह कहने वाला ना हो कि यह ज़मीन मेरे बाप दादा ने दी है। वाहेगुरु
और यही अरदास हुई और बिलकुल ऐसा ही हुआ कि उन सिख के घर कोई औलाद नहीं हुई।

Help from god

एक कहानी जो दिल को छू गयी,

एक बार जरूर पढे.......
वह शख्स गाड़ी से उतरा.. और बड़ी तेज़ी से एयरपोर्ट मे घुसा , जहाज़ उड़ने के लिए तैयार था , उसे किसी कांफ्रेंस मे पहुंचना था जो खास उसी के लिए आयोजित की जा रही थी.....
वह अपनी सीट पर बैठा और जहाज़ उड़ गया...अभी कुछ दूर ही जहाज़ उड़ा था कि....कैप्टन ने ऐलान किया , तूफानी बारिश और बिजली की वजह से जहाज़ का रेडियो सिस्टम ठीक से काम नही कर रहा....इसलिए हम क़रीबी एयरपोर्ट पर उतरने के लिए मजबूर हैं.।
जहाज़ उतरा वह बाहर निकल कर कैप्टन से शिकायत करने लगा कि.....उसका एक-एक मिनट क़ीमती है और होने वाली कांफ्रेस मे उसका पहुचना बहुत ज़रूरी है....पास खड़े दूसरे मुसाफिर ने उसे पहचान लिया....और बोला डॉक्टर पटनायक आप जहां पहुंचना चाहते हैं.....टैक्सी द्वारा यहां से केवल तीन घंटे मे पहुंच सकते हैं.....उसने शुक्रिया अदा किया और टैक्सी लेकर निकल पड़ा...

लेकिन ये क्या आंधी , तूफान , बिजली , बारिश ने गाड़ी का चलना मुश्किल कर दिया , फिर भी ड्राइवर चलता रहा...
अचानक ड्राइवर को एह़सास हुआ कि वह रास्ता भटक चुका है...
ना उम्मीदी के उतार चढ़ाव के बीच उसे एक छोटा सा घर दिखा....इस तूफान मे वही ग़नीमत समझ कर गाड़ी से नीचे उतरा और दरवाज़ा खटखटाया....
आवाज़ आई....जो कोई भी है अंदर आ जाए..दरवाज़ा खुला है...

अंदर एक बुढ़िया आसन बिछाए भगवद् गीता पढ़ रही थी...उसने कहा ! मांजी अगर इजाज़त हो तो आपका फोन इस्तेमाल कर लूं...

बुढ़िया मुस्कुराई और बोली.....बेटा कौन सा फोन ?? यहां ना बिजली है ना फोन..
लेकिन तुम बैठो..सामने जल है , पी लो....थकान दूर हो जायेगी..और खाने के लिए भी कुछ ना कुछ फल मिल जायेगा.....खा लो ! ताकि आगे सफर के लिए कुछ शक्ति आ जाये...

डाक्टर ने शुक्रिया अदा किया और जल पीने लगा....बुढ़िया अपने पाठ मे खोई थी कि उसकेे पास उसकी नज़र पड़ी....एक बच्चा कंबल मे लपेटा पड़ा था जिसे बुढ़िया थोड़ी थोड़ी देर मे हिला देती थी...
बुढ़िया फारिग़ हुई तो उसने कहा....मांजी ! आपके स्वभाव और एह़सान ने मुझ पर जादू कर दिया है....आप मेरे लिए भी दुआ
कर दीजिए....यह मौसम साफ हो जाये मुझे उम्मीद है आपकी दुआऐं ज़रूर क़बूल होती होंगी...

बुढ़िया बोली....नही बेटा ऐसी कोई बात नही...तुम मेरे अतिथी हो और अतिथी की सेवा ईश्वर का आदेश है....मैने तुम्हारे लिए भी दुआ की है.... परमात्मा का शुक्र है....उसने मेरी हर दुआ सुनी है..
बस एक दुआ और मै उससे माँग रही हूँ शायद जब वह चाहेगा उसे भी क़बूल कर लेगा...

कौन सी दुआ..?? डाक्टर बोला...

बुढ़िया बोली...ये जो 2 साल का बच्चा तुम्हारे सामने अधमरा
पड़ा है , मेरा पोता है , ना इसकी मां ज़िंदा है ना ही बाप , इस बुढ़ापे मे इसकी ज़िम्मेदारी मुझ पर है , डाक्टर कहते हैं...इसे कोई खतरनाक रोग है जिसका वो इलाज नही कर सकते , कहते हैं एक ही नामवर डाक्टर है , क्या नाम बताया था उसका !
हां "डॉ पटनायक " ....वह इसका ऑप्रेशन कर सकता है , लेकिन मैं बुढ़िया कहां उस डॉ तक पहुंच सकती हूं ? लेकर जाऊं भी तो पता नही वह देखने पर राज़ी भी हो या नही ? बस अब बंसीवाले से ये ही माँग रही थी कि वह मेरी मुश्किल आसान कर दे..!!

डाक्टर की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह रहा है....वह भर्राई हुई आवाज़ मे बोला !
माई...आपकी दुआ ने हवाई जहाज़ को नीचे उतार लिया , आसमान पर बिजलियां कौदवां दीं , मुझे रस्ता भुलवा दिया , ताकि मैं यहां तक खींचा चला आऊं ,हे भगवान! मुझे यकीन ही नही हो रहा....कि भगवान एक दुआ क़बूल करके अपने भक्तौं के लिए इस तरह भी मदद कर सकता है.....!!!!

दोस्तों वह सर्वशक्तीमान है....परमात्मा के बंदो उससे लौ लगाकर तो देखो...जहां जाकर इंसान बेबस हो जाता है , वहा ं से उसकी परमकृपा शुरू होती है...।यह आप सबसे अधिक लोगो को भेजे ताकि मुझ जैसे लाखो लोगो की आँखे खुले।

Message for good life

EXCELLENT MESSAGE
*|||||||| "ये ही सत्य हैं" |||||*

*Qus→   जीवन का उद्देश्य क्या है ?*
Ans→  जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है - जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है..!!
*Qus→  जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है ?* 
Ans→  जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया - वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है..!!
*Qus→  संसार में दुःख क्यों है ?*
Ans→  लालच, स्वार्थ और भय ही संसार के दुःख का मुख्य कारण हैं..!!
*Qus→  ईश्वर ने दुःख की रचना क्यों की ?*
Ans→  ईश्वर ने संसार की रचना की और मनुष्य ने अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की..!!
*Qus→  क्या ईश्वर है ? कौन है वे ? क्या रुप है उनका ? क्या वह स्त्री है या पुरुष ?*
 Ans→   कारण के बिना कार्य नहीं। यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो, इसलिए वे भी है - उस महान कारण को ही आध्यात्म में 'ईश्वर' कहा गया है। वह न स्त्री है और ना ही पुरुष..!!
*Qus→   भाग्य क्या है ?*
Ans→  हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है तथा आज का प्रयत्न ही कल का भाग्य है..!!
*Qus→   इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ?* 
Ans→   रोज़ हजारों-लाखों लोग मरते हैं और उसे सभी देखते भी हैं, फिर भी सभी को अनंत-काल तक जीते रहने की इच्छा होती है..इससे बड़ा आश्चर्य ओर क्या हो सकता है..!!
*Qus→   किस चीज को गंवाकर मनुष्य धनी बनता है ?*
Ans→   लोभ..!!
*Qus→   कौन सा एकमात्र उपाय है जिससे जीवन सुखी हो जाता है?* 
Ans →   अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है..!!
*Qus →   किस चीज़ के खो जानेपर दुःख नहीं होता ?*
Ans →   क्रोध..!!
*Qus→   धर्म से बढ़ कर संसार में और क्या है ?*
Ans →   दया..!!
*Qus→   क्या चीज़ दूसरों को नहीं देनी चाहिए ?*
Ans→   तकलीफें, धोखा..!!
*Qus→   क्या चीज़ है, जो दूसरों से कभी भी नहीं लेनी चाहिए ?*
Ans→   इज़्ज़त, किसी की हाय..!! 
*Qus→   ऐसी चीज़ जो जीवों से सब कुछ करवा सकती है?*
Ans→   मज़बूरी..!!🌸
*Qus→   दुनियां की अपराजित चीज़ ?*
Ans→  सत्य..!!
*Qus→ दुनियां में सबसे ज़्यादा बिकने वाली चीज़ ?*
Ans→   झूठ..!!💜
*Qus→   करने लायक सुकून का कार्य ?*
Ans→ परोपकार..!!🌸
*Qus→   दुनियां की सबसे बुरी लत ?*
Ans→ मोह..!!💝
*Qus→   दुनियां का स्वर्णिम स्वप्न ?*
Ans→   जिंदगी..!!🍀
*Qus→   दुनियां की अपरिवर्तनशील चीज़ ?*
Ans→   मौत..!!💜
*Qus→   ऐसी चीज़ जो स्वयं के भी समझ ना आये ?*
Ans→   अपनी मूर्खता..!!🌸
*Qus→   दुनियां में कभी भी नष्ट/ नश्वर न होने वाली चीज़ ?*
Ans→   आत्मा और ज्ञान..!!💝
*Qus→   कभी न थमने वाली चीज़ ?*
Ans→   समय..
🙏🙏🙏

Satsang by sangat ji

SATSANG
A new life for my special child

B. N. Andley, January 2012

I have read and heard of Guruji helping people in difficult times. But all of these satsangs happened to be of those devotees who had met Guruji in His physical form.

I have never met Guruji in person, yet it is my firm conviction that He is omnipresent and keeps constant watch on his bhaktas and helps them sail through any problem-provided the devotee has surrendered to Him totally.

My satsang illustrates this. In October, 2010 my younger son, who has Down syndrome, fell prey to dengue. It was Dussehra day when his blood report revealed that his platelet count had nosedived to 32,000 platelets per microlitre against the normal range of 1.5 lakh to 2 lakh per microlitre. He was admitted to Max Hospital, Saket. He was immediately shifted to the ICU when he passed a lot of blood through the stool. His condition kept deteriorating.

On the third day, doctors called us at 3 in the night to inform us that he was bleeding internally and that his organs-the liver and kidney-had begun failing. Liver failure had affected his brain; he had stopped recognizing people and was not making eye contact. He was put on a ventilator. Doctors believed the only chance was to go for a liver transplant-yet none of our family members' blood groups matched our son's. Doctors lost all hope and so did we. There was no chance of survival. It was a matter of three to four hours.

Fortune brought a friend of my elder son to the hospital. He suggested to my elder son that he go to Guruji's Bade Mandir. We had never heard about Guruji, and my wife told my son that he should spend whatever short time was left with his brother. She suggested that my elder son could go to the ashram the next day. My son's friend, however, insisted that we needed to go to the Mandir that day itself: What would we do the next day?

Finally, my wife allowed our son to leave. It was a Wednesday. My son and his friend had darshan of the samadhi, but the rest of the Mandir was closed off for repair and renovation. They went to the court yard at the back and found the gardener. He told them there was nobody else at the Mandir. My son meanwhile wanted to at the very least see Guruji's photo, as he had never seen Him before. He began weeping uncontrollably.

As if on cue, a lady devotee came out and asked about his plight. She learnt of our grave trouble and assured my eldest son that everything would be fine. She had a Mandir room opened, where my son bowed in front of Guruji's photograph. She gave the friends laddoo and samosa prasad along with a bottle of amrit (water) and directed my son to give the prasad to the patient. That was not feasible, because my son was on a ventilator. The devotee then gave my son a photograph of Guruji and asked that it be kept under the patient's pillow. She also managed to bring a flower from Guruji's samadhi.

Returning from the Mandir, my son felt enormous strength and very positive energy. He came back to hospital, explained everything and also expressed his certainty that his brother would be saved. We kept Guruji's photograph under my son's pillow. Right away my eldest son felt that Guruji had taken over all our problems and his brother would be fine. He felt as if Guruji was saying, now I have come and nothing untoward will happen.

The next morning my son showed signs of improvement. A day later he had recovered his senses. The doctors were surprised and said it was a miracle, as they had not seen anyone pull through from a similar situation. By the third day, my son had started taking a normal diet. He is now hale and hearty and regularly goes to the ashram with us.

Such miracles can only happen with Guruji's kripa. Guruji's grace flowed towards us even though the Mandir was closed in the form of every possible means available at the Mandir-the flowers, prasad, and Guruji's photograph. That is because Guruji is always there and knows the problems and state of mind of those coming to His Mandir. Guruji Maharaj can appear in any form, or send His devotees to help those in need
Shukrana Guruji

Faith in guruji brings relief

SATSANG SHARED BY SANGAT
JAI GURUJI
I am a doctor (eye surgeon) retina specialist by profession, 2 years back I started having severe back pain which started  affecting my personal & professional life gradually, I consulted top institutions & consulted top spine specialists of country, I didnt spare even a single investigation or scan, I was diagnosed severe damage to vertebral disc in spine due to infection & trauma. I took best of best treatment but pain kept growing in severity, situation became worse & worse, finally I got bed ridden & I was prescribed total bed rest not even going to toilet was allowed for 6 months, I became totally hopeless & cried in my heart. My life was overloaded with multiple pain killers medicines & antibiotics from 1 year.
I was hearing about GURUJI from last few months from few of my patients , one of my Nurse & my school friend also, that he is miracle & I should visit his temple. I was never religious in my life but as I lost all hopes & there was no improvement , after thinking for months, I decided that I will go to Guruji 🙏🏻 bade mandir. I remember me & my mother went together to mandir, there were tears in both of our eyes when we were standing in Qeue, I was in intolerable pain & was not even able to stand there for 15 mins. I got chair in the corner of mandir & spent 1 hour there & had chai prasad there & came back. I didnt demanded anything from Guruji & I just felt very relieved going there.
From the next day only I felt miraculous inprovement in pain altough the medicines were same but they started working. I was surprised I didnt take painkiller even single tablet for 1 month , which I used to take 4-5 tablets in a day. I dont understand Is this miracle, coincidence or Guruji 🙏🏻 blessing.
Today I am leading a nearly normal life with my kids & family, I am doing well in my profession. I am running 2 hospitals in Delhi, doing 15-20 surgeries everyday, seeing 200 ptients OPD everyday. All due to Guruji🙏🏻 divine healing & blessings.
I dont have words to thank 🙏🏻 Guruji.
May Guruji shower his blessing on all needy, poor  & helpless on this earth like he did for me.🙏🏻🙏🏻🙏🏻💐💐💐💐

JAI GURU JI

Saint Mastkin ji

*संत सिंह मसकीन साहब सिख पंथ के बड़े विद्वान थे।उनका एक बार औरंगजेब की मजार पर जाना हुआ, उस समय का प्रसंग है।*

ज्ञानी संत सिंह मस्कीन जी के मुगल शहंशाह औरंगज़ेब के बारे में उन्हीं की जुबानी ....

कुछ अरसा पहले मुझे औरंगाबाद जाने का मौक़ा मिला । कई बार हजूर साहिब( महाराष्ट्र ) जाते समय उधर से ही जाना होता था ।

एक बार प्रबन्धकों ने कहा ज्ञानी जी यहाँ से ७-८ किलोमीटर की दूरी पर खुलदाबाद में औरंगज़ेब की क़ब्र है । अगर आप चाहें तो आप को दिखा लायें । कभी उधर से गुज़रते हुए देखी भी थी फिर देखने की इच्छा हुई चलो देख आते हैं ।

हम वहाँ पहुँचे । वहाँ पर मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेर शरीफ़ वाले के पडपोते के मक़बरे के नज़दीक ही औरंगज़ेब की कच्ची क़ब्र है । निज़ाम हैदराबाद ने चारों ओर जालीनुमा संगमरमर लगवा दिया है ।

मैंने उस क़ब्र को देखा, सामने पत्थर की तख्ती पर कुछ शेयर लिखे थे और कुछ थोड़ा बहुत समकालीन इतिहास लिखा था, उसको मैंने नोट किया ।

जैसे ही मैं वहाँ से चलने लगा, वहाँ देखभाल के लिये जो आदमी ( मजौर) बैठा था, मुझसे बोला सरदार जी कुछ पैसे दे के जाओ । मैंने पूछा तुम्हारी आजीविका का कोई मसला है ?

उसने कहा नहीं । यहाँ जो भी लोग ( जहरीन) आते हैं,आप जैसे लोग आते हैं हमें कुछ दे के जाते हैं । उन्हीं पैसों से रात को तेल लाकर यहाँ दिया जलता है। इसलिये तेल के लिए कुछ पैसे चाहिये । आप भी हमें तेल के लिये कुछ पैसे दे कर जाओ ।

मैंने जेब से कुछ पैसे निकाले और व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा-- ये लो पैसे, ले आना तेल और जला देना औरंगज़ेब की क़ब्र ( मडी ) पे दिया । उसके बोल मैंने अपनी डायरी में लिख लिये के कहीं मैं भूल ना जाऊँ । मेरे अन्दर से एक आवाज़ आई -

"ऐ औरंगज़ेब, तेरी क़ब्र पर रात को दिया जलाने के लिये तेरी क़ब्र पर बैठा मजौर आने वाले यात्रियों से पैसे माँगता है ...

...परन्तु जिस सतगुरू को तूने दिल्ली की चाँदनी चौक में शहीद किया ( करवाया), जिन साहिबजादों को तूने सरहन्द ( फतेहगढ साहिब पंजाब )में ज़िन्दा दीवारों में चिनवा दिया...

...जा कर देख वहाँ पैसे के दरिया बहते हैं । भूखों को भोजन मिल रहा है । दिन रात कथा- कीर्तन के परवाह चल रहे हैं । लोग सुन-सुन कर रबी सरूर का आन्नद प्राप्त कर रहे हैं । और ये सब देख कर कहना पड़ता है।।

कूड़ निखुटे नानका ओड़कि सचि रही ।।२।। ( गुरू ग्रन्थ साहिब अंग 953 )

सच ने हमेशा क़ायम रहना है । सच की आवाज़ हमेशा गूँजती रहेगी । झूठ की अन्ततः हार होती है।

🙏
बोलो सतनाम श्री वाहेगुरु जी

Hell

नरक होते हैं कि नहीं? जी बिल्कुल होते हैं। ग्रंथों में नरकों की दूरी इत्यादि का पूर्ण वर्णन प्राप्त होता है। नरक तो अनेक हैं, भिन्न भिन्न शास्त्रों में उनकी भिन्न संख्याएँ बताई गई हैं। जो पापकर्म करते हैं और किए जा चुके पापों का प्रायश्चित्त नहीं करते, वे इन भयंकर नरकों में ले जाए जाते हैं। श्रीमद् भागवत, गरुड़ पुराण इत्यादि ग्रंथों में नरकों से बचने का सरल उपाय पापकर्मों से दूर रहना और भगवन्नाम जपना बताया गया है।

आइए कुछ नरकों के बारे में जानें -

1.महाविचि :- महाविचि नाम का नरक रक्त यानि खून से भरा पड़ा है, तथा इसमें व्रज के समान कांटे है.जिसमे आत्मा इन काँटों में बिंधकर कष्ट पाता है. कहा जाता है की इस
नरक में गायों की ह्त्या करने वाले व्यक्तियों की आत्मा सजा पाती है.

2 . कुम्भी पाक :- इस नरक की जमीन गर्म रेत और अंगारे से बनी हुए है. इस नरक में वे आत्माएं सजा पाती है जिन्होंने अपने मनुष्य रूप में किसी की जमीन हड़पी थी या ब्राह्मणो की ह्त्या करने वाला भी इस नरक में सजा पाता है।

3 .रौरव :- जो लोग अपनी सारी जिंदगी असत्य बोलते आये है या जो झूठी गवाही देते ही ऐसे व्यक्तियों को मृत्यु के पश्चात इस नरक में ईख की तरह पेरा जाता है.

4 . मंजुश :- इस नरक में लोगो को सजा दी जाती है जिन्होंने निर्दोषों को बंदी बनाया था. इस नरक की सलाखें अग्नि की बनी है. जहाँ दोषी को डालकर जलाया जाता है.

5 . अप्रतिष्ठ :- इस नरक में उन लोगो को सजा दी जाती है जिन्होंने धार्मिक व्यक्तियों को सताया था. यह नरक मल-मूत्र तथा पीब से भरा पड़ा है व इस नरक में दोषी को ऊपर से उलटा लटकाकर गेरा जाता है.

6 . विलपक :- इस नरक में वैसे ब्राह्मण जाते है जिन्होंने अपने जीवन में मदिरा-पान किया था ,इस आग में जीव को झोंक द‌िया जाता है.

7 . महाप्रभ :- यह नरक बहुत ऊंचा है. इसमें बड़ा से शूल गड़ा है. जो व्यक्त‌ि पत‌ि-पत्नी में व‌िभेद करवाकर उन्हें अलग करवाते हैं उन्हे इस नरक में डालकर शूल से छेदा जाता है.

8 . जयन्ती :- इस नरक में एक व‌िशाल चट्टान है. इस नरक में परायी स्‍त्र‌ियों के साथ शारीर‌िक संबंध बनाने वाले को इसी चट्टान के नीचे दबाया जाता है.

9 . शल्मल‌ि :-यह नरक जलते हुए कांटों से भरा हुआ है. इस नरक में उन स्‍त्र‌ियों को जलते हुए शल्म‌ल‌ि वृक्ष का आल‌िंगन करना पड़ता है जो पर पुरुष से संबंध बनाती है. यहां परायी स्‍त्र‌ियों से संबंध बनाने और कुदृष्ट‌ि रखने वालों की यमदूत आंखें फोड़ देते हैं.

10 . महारौरव :- जो लोग खेत, खल‌िहान और गांव, घर में आग लगाते हैं उन्हें युगों तक इस नरक में पकाया जाता है.

11 .तामिस्र :- इस नर्क में यमदूत चोरी जैसे अपराध करने वाले व्यक्तियों को भयंकर अस्त्रों से सजा देते है.

12 . असिपत्र :- इस वन के पत्ते तलवार जैसे हैं. म‌ित्रों को धोखा देने वालों को इस वन में डाल द‌िया जाता है जहां वर्षों तक इस वन के पत्तों से कट फट कर जीव दुःखी होता रहता है.

13 . करंभबलुका :- यह नर्क कुए जैसा है जिसमे गर्म रेत, अंगारे और काटे बिछे हुए है. जहाँ पाप कर्म करने वालो को दस हजार वर्षो तक यहाँ की यातनाएं झेलनी पड़ती है.

14 . कडमल :- जो व्यक्ति अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में पंचयज्ञ नहीं करते उन्हें इस मल-मूत्र एवं रक्त से भरे नर्क में गिराया जाता है.

15 . काकोल :- कीड़े और पीब से भरे इस नर्क में उन्हें ग‌िराया जाता है जो दूसरों को द‌िए ब‌िना अकेले म‌िष्टान खाते हैं.

16 . महावट :- यह नर्क मुर्दो और कीड़ों से भरा हुआ इस नर्क में उन व्यक्तियों को सजा दी जाती है जो अपनी बेटियों को बेच देते है.

17 . त‌िलपाक :- दूसरों को सताने वाले लोगों को इस नर्क में डाला जाता है जहां त‌िल से जैसे तेल न‌िकाला जाता है उसी प्रकार उन्हें पेर कर उन्हें दंड द‌िया जाता है.

18 . महाभीम :- यह नर्क सड़े हुए मांस और रक्त से भरा हुआ है तथा यहाँ उन व्यक्तियों को सजा दी जाती है जो अपने जीवन काल में मांस मदिरा और अखाद्य पदार्थो का प्रयोग करते है.

19 .व्रजकपाट :- इस नर्क में उन लोगो को सजा दी जाती है जिन्होंने पशुओं पर अत्याचार किया हो तथा उनके कारण निर्दोष पशुओं का वध हुआ हो.

20 . तैलपाक :- इस नर्क में शरण में आए हुए लोगों की मदद नहीं करने वाले को तेल के कड़ाही में पकाया जाता है.

21. वज्रकपाट :- यहां वज्रों की पूरी श्रंखला बनी है. जो लोग दूध बेचने का व्यवसाय करते हैं, वे यहां प्रताड़ना पाते हैं.

22. निरुच्छवास :- इस नर्क में अंधेरा है, यहां वायु नहीं होती. जो लोग दिए जा रहे दान में विघ्न डालते हैं वे यहां फेंके जाते हैं.

23. अंगारोपच्य :- यह नर्क अंगारों से भरा है. जो लोग दान देने का वादा करके भी दान देने से मुकर जाते हैं. वे यहां जलाए जाते हैं.

24. महापायी :- यह नर्क हर तरह की गंदगी से भरा है. हमेशा असत्य बोलने वाले यहां औंधे मुंह गिराए जाते हैं.

25. महाज्वाल :- इस नर्क में हर तरफ आग है. जो लोग हमेशा ही पाप में लगे रहते हैं वे इसमें जलाए जाते हैं.

26 . गुडपाक :- इस नर्क में चारो तरफ गर्म गुड के कुँए है तथा जो लोग वर्ण संकरता फैलाते है उन्हें इस नर्क में सजा दी जाती है.

27 . क्रकच :- इस नर्क में तीखे आरे लगे हुई तथा इस नर्क में उन लोगो को सजा दी जाती है जिन्होंने गलत संगति का साथ देकर अपने जीवन में असंख्य पाप किये हो.

28. क्षुरधार :- यह नर्क तीखे उस्तरों से भरा है. ब्राह्मणों की भूमि हड़पने वाले यहां काटे जाते हैं.

29. अम्बरीष :- यहां प्रलय अग्रि के समान आग जलती है. जो लोग सोने की चोरी करते हैं, वे इस आग में जलाए जाते हैं.

30. वज्रकुठार :- यह नर्क वज्रों से भरा है. जो लोग पेड़ काटते हैं वे यहां लंबे समय तक वज्रों से पीटे जाते हैं.

31 . परिताप :- यह नर्क भी आग से भरा हुआ है तथा इसमें उन व्यक्तियों को सजा दी जाती है जिन्होंने दूसरों को जहर दिया हो या मधु की चोरी करी हो ।

32 . कालसूत्र :- यह नर्क व्रज के समान सूत से बना हुआ है तथा इसमें उन व्यक्तियों को सजा दी जाती है जिन्होंने दूसरों की खेती नष्ट करी हो.

33 . कश्मल :- यह नर्क नाक और मुंह की गंदगी से भरा हुआ है तथा इस नर्क में उन लोगो को गिराया जाता है जिन्हे मांसाहार में रूचि होती है.

34 . उगर्गन्ध :- यह लार, मूत्र, विष्ठा और अन्य गंदगियों से भरा नर्क है. जो लोग पितरों को पिंडदान नहीं करते, वे यहां लाए जाते हैं.

35 . दुर्धर :- यह नर्क जौक और बिच्छुओं से भरा है. सूदखोर और ब्याज का धंधा करने वाले इस नर्क में भेजे जाते हैं.

36 . व्रजमहापिड :- यहाँ यमदूतों दवारा लोगो को भारी व्रजो से प्रताड़ित किया जाता है, इस नर्क में ऐसे लोगो को सजा दी जाती है जिन्होंने कभी भी कोई पुण्य ना किया हो. जिन लोगो का रोजगार ही दूसरों की हत्या करना हो उन्हें इस नर्क में यमदूतों द्वारा अग्नि में जलाकर कोडों से प्रताड़ित किया जाता है।

अतः, यदि इनसे बचना है तो भगवन्नाम का आश्रय लो और पापों से दूर रहो।

।। जय श्रीराम ।।