Saint Mastkin ji

*संत सिंह मसकीन साहब सिख पंथ के बड़े विद्वान थे।उनका एक बार औरंगजेब की मजार पर जाना हुआ, उस समय का प्रसंग है।*

ज्ञानी संत सिंह मस्कीन जी के मुगल शहंशाह औरंगज़ेब के बारे में उन्हीं की जुबानी ....

कुछ अरसा पहले मुझे औरंगाबाद जाने का मौक़ा मिला । कई बार हजूर साहिब( महाराष्ट्र ) जाते समय उधर से ही जाना होता था ।

एक बार प्रबन्धकों ने कहा ज्ञानी जी यहाँ से ७-८ किलोमीटर की दूरी पर खुलदाबाद में औरंगज़ेब की क़ब्र है । अगर आप चाहें तो आप को दिखा लायें । कभी उधर से गुज़रते हुए देखी भी थी फिर देखने की इच्छा हुई चलो देख आते हैं ।

हम वहाँ पहुँचे । वहाँ पर मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेर शरीफ़ वाले के पडपोते के मक़बरे के नज़दीक ही औरंगज़ेब की कच्ची क़ब्र है । निज़ाम हैदराबाद ने चारों ओर जालीनुमा संगमरमर लगवा दिया है ।

मैंने उस क़ब्र को देखा, सामने पत्थर की तख्ती पर कुछ शेयर लिखे थे और कुछ थोड़ा बहुत समकालीन इतिहास लिखा था, उसको मैंने नोट किया ।

जैसे ही मैं वहाँ से चलने लगा, वहाँ देखभाल के लिये जो आदमी ( मजौर) बैठा था, मुझसे बोला सरदार जी कुछ पैसे दे के जाओ । मैंने पूछा तुम्हारी आजीविका का कोई मसला है ?

उसने कहा नहीं । यहाँ जो भी लोग ( जहरीन) आते हैं,आप जैसे लोग आते हैं हमें कुछ दे के जाते हैं । उन्हीं पैसों से रात को तेल लाकर यहाँ दिया जलता है। इसलिये तेल के लिए कुछ पैसे चाहिये । आप भी हमें तेल के लिये कुछ पैसे दे कर जाओ ।

मैंने जेब से कुछ पैसे निकाले और व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा-- ये लो पैसे, ले आना तेल और जला देना औरंगज़ेब की क़ब्र ( मडी ) पे दिया । उसके बोल मैंने अपनी डायरी में लिख लिये के कहीं मैं भूल ना जाऊँ । मेरे अन्दर से एक आवाज़ आई -

"ऐ औरंगज़ेब, तेरी क़ब्र पर रात को दिया जलाने के लिये तेरी क़ब्र पर बैठा मजौर आने वाले यात्रियों से पैसे माँगता है ...

...परन्तु जिस सतगुरू को तूने दिल्ली की चाँदनी चौक में शहीद किया ( करवाया), जिन साहिबजादों को तूने सरहन्द ( फतेहगढ साहिब पंजाब )में ज़िन्दा दीवारों में चिनवा दिया...

...जा कर देख वहाँ पैसे के दरिया बहते हैं । भूखों को भोजन मिल रहा है । दिन रात कथा- कीर्तन के परवाह चल रहे हैं । लोग सुन-सुन कर रबी सरूर का आन्नद प्राप्त कर रहे हैं । और ये सब देख कर कहना पड़ता है।।

कूड़ निखुटे नानका ओड़कि सचि रही ।।२।। ( गुरू ग्रन्थ साहिब अंग 953 )

सच ने हमेशा क़ायम रहना है । सच की आवाज़ हमेशा गूँजती रहेगी । झूठ की अन्ततः हार होती है।

🙏
बोलो सतनाम श्री वाहेगुरु जी

No comments: